वाल्मीकि रामायण 5.46.32
भासकर्णश्च संक्रुद्धः शूलमादाय वीर्यवान् ।एकतः कपिशार्दूलं यशस्विनमवस्थितम्॥
bhāsakarṇaśca saṃkruddhaḥ śūlamādāya vīryavān |ekataḥ kapiśārdūlaṃ yaśasvinamavasthitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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