वाल्मीकि रामायण 5.47.19
ततः कपिस्तं रणचण्डविक्रमं विवृद्धतेजोबलवीर्यसंयुतम् ।कुमारमक्षं प्रसमीक्ष्य संयुगे ननाद हर्षाद्घनतुल्यविक्रमः॥
tataḥ kapistaṃ raṇacaṇḍavikramaṃ vivṛddhatejobalavīryasaṃyutam |kumāramakṣaṃ prasamīkṣya saṃyuge nanāda harṣādghanatulyavikramaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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