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वाल्मीकि रामायण 5.47.4
तपस्सङ्ग्रहसञ्चयार्जितं तपोनुष्ठनसमूहसम्पादितम्॥
tapassaṅgrahasañcayārjitaṃ taponuṣṭhanasamūhasampāditam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंतपस्सङ्ग्रहसञ्चयार्जितं तपोनुष्ठनसमूहसम्पादितम्॥
tapassaṅgrahasañcayārjitaṃ taponuṣṭhanasamūhasampāditam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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