वाल्मीकि रामायण 5.48.3
तवास्त्रबलमासाद्य नासुरा न मरुद्गणाः ।न शेकुः समरे स्थातुं सुरेश्वरसमाश्रिताः॥
tavāstrabalamāsādya nāsurā na marudgaṇāḥ |na śekuḥ samare sthātuṃ sureśvarasamāśritāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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