वाल्मीकि रामायण 5.48.39
तेन बद्धस्ततो ऽस्त्रेण राक्षसेन स वानरः ।अभवन्निर्विचेष्टश्च पपात च महीतले॥
tena baddhastato 'streṇa rākṣasena sa vānaraḥ |abhavannirviceṣṭaśca papāta ca mahītale ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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