वाल्मीकि रामायण 5.48.6
ममानुरूपं तपसो बलं च ते पराक्रमश्चास्त्रबलं च संयुगे ।न त्वां समासाद्य रणावमर्दे मनः श्रमं गच्छति निश्चितार्थम्॥
mamānurūpaṃ tapaso balaṃ ca te parākramaścāstrabalaṃ ca saṃyuge |na tvāṃ samāsādya raṇāvamarde manaḥ śramaṃ gacchati niścitārtham ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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