वाल्मीकि रामायण 5.48.8
बलानि सुसमृद्धानि साश्वनागरथानि च ।सहोदरस्ते दयितः कुमारो ऽक्षश्च सूदितः॥
balāni susamṛddhāni sāśvanāgarathāni ca |sahodaraste dayitaḥ kumāro 'kṣaśca sūditaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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