वाल्मीकि रामायण 5.49.10
अलंकृताभिरत्यर्थं प्रमदाभिः समन्ततः ।वालव्यजनहस्ताभिरारात् समुपसेवितम्॥
alaṃkṛtābhiratyarthaṃ pramadābhiḥ samantataḥ |vālavyajanahastābhirārāt samupasevitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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