वाल्मीकि रामायण 5.49.16
भ्राजमानं ततो दृष्ट्वा हनुमान् राक्षसेश्वरम् ।मनसा चिन्तयामास तेजसा तस्य मोहितः॥
bhrājamānaṃ tato dṛṣṭvā hanumān rākṣaseśvaram |manasā cintayāmāsa tejasā tasya mohitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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