वाल्मीकि रामायण 5.49.18
यद्यधर्मो न बलवान् स्यादयं राक्षसेश्वरः ।स्यादय सुरलोकस्य सशक्रस्यापि रक्षिता॥
yadyadharmo na balavān syādayaṃ rākṣaseśvaraḥ |syādaya suralokasya saśakrasyāpi rakṣitā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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