वाल्मीकि रामायण 5.49.3
वज्रसंयोगसंयुक्तैर्महार्हमणिविग्रहैः ।हैमैराभरणैश्चित्रैर्मनसेव प्रकल्पितैः॥
vajrasaṃyogasaṃyuktairmahārhamaṇivigrahaiḥ |haimairābharaṇaiścitrairmanaseva prakalpitaiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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