वाल्मीकि रामायण 5.53.10
स भूयः सङ्गतैः क्रूरै राक्षसैर्हरिसत्तमः ।निबद्धः कृतवान् वीरस्तत्कालसदृशीं मतिम्॥
sa bhūyaḥ saṅgataiḥ krūrai rākṣasairharisattamaḥ |nibaddhaḥ kṛtavān vīrastatkālasadṛśīṃ matim ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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