वाल्मीकि रामायण 5.53.19
अन्वीयमानो रक्षोभिर्ययौ सुखमरिन्दमः ।हनुमांश्चारयामास राक्षसानां महापुरीम्॥
anvīyamāno rakṣobhiryayau sukhamarindamaḥ |hanumāṃścārayāmāsa rākṣasānāṃ mahāpurīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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