वाल्मीकि रामायण 5.53.23
स्त्रीबालवृद्धा निर्जग्मुस्तत्र तत्र कुतूहलात् ।तं प्रदीपितलाङ्गूलं हनुमन्तं दिदृक्षवः॥
strībālavṛddhā nirjagmustatra tatra kutūhalāt |taṃ pradīpitalāṅgūlaṃ hanumantaṃ didṛkṣavaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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