वाल्मीकि रामायण 5.53.26
श्रत्वा तद्वचनं क्रूरमात्मापहरणोपमम् ।वैदेही शोकसन्तप्ता हुताशनमुपागमत्॥
śratvā tadvacanaṃ krūramātmāpaharaṇopamam |vaidehī śokasantaptā hutāśanamupāgamat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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