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वाल्मीकि रामायण 5.53.34
दह्यमाने च लाङ्गूले चिन्तयामास वानरः॥
dahyamāne ca lāṅgūle cintayāmāsa vānaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंदह्यमाने च लाङ्गूले चिन्तयामास वानरः॥
dahyamāne ca lāṅgūle cintayāmāsa vānaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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