वाल्मीकि रामायण 5.53.38
सीतायाश्चानृशंस्येन तेजसा राघवस्य च ।पितुश्च मम सख्येन न मां दहति पावकः॥
sītāyāścānṛśaṃsyena tejasā rāghavasya ca |pituśca mama sakhyena na māṃ dahati pāvakaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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