वाल्मीकि रामायण 5.55.1
लङ्कां समस्तां सन्दीप्य लाङ्गूलाग्निं महाबलः ।निर्वापयामास तदा समुद्रे हरिसत्तमः॥
laṅkāṃ samastāṃ sandīpya lāṅgūlāgniṃ mahābalaḥ |nirvāpayāmāsa tadā samudre harisattamaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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