वाल्मीकि रामायण 5.55.18
विनष्टायां तु सीतायां तावुभौ विनशिष्यतः ।तयोर्विनाशे सुग्रीवः सबन्धुर्विनशिष्यति॥
vinaṣṭāyāṃ tu sītāyāṃ tāvubhau vinaśiṣyataḥ |tayorvināśe sugrīvaḥ sabandhurvinaśiṣyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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