वाल्मीकि रामायण 5.56.32
स च भूमिधरः श्रीमान् बलिना तेन पीडितः ।सवृक्षशिखरोदग्रः प्रविवेश रसातलम्॥
sa ca bhūmidharaḥ śrīmān balinā tena pīḍitaḥ |savṛkṣaśikharodagraḥ praviveśa rasātalam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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