वाल्मीकि रामायण 5.57.2
पुलर्वसुमहामीनं लोहिताङ्गमहाग्रहम् ।ऐरावतमहाद्वीपं स्वातीहंसविलोलितम्॥
pularvasumahāmīnaṃ lohitāṅgamahāgraham |airāvatamahādvīpaṃ svātīhaṃsavilolitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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