वाल्मीकि रामायण 5.57.39एकवेणीधरा बाला रामदर्शनलालसा ।उपवासपरिश्रान्ता जटिला मलिना कृशा॥ekaveṇīdharā bālā rāmadarśanalālasā |upavāsapariśrāntā jaṭilā malinā kṛśā ||इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें