वाल्मीकि रामायण 5.58.102
इत्यक्त्वा तु वरारोहा मणिप्रवरमद्भुतम् ।प्रायच्छत् परमोद्विग्ना वाचा मां संदिदेश ह॥
ityaktvā tu varārohā maṇipravaramadbhutam |prāyacchat paramodvignā vācā māṃ saṃdideśa ha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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