वाल्मीकि रामायण 5.58.104
उत्तरं पुनरेवेदं निश्चित्य मनसा तया ।हनुमन् मम वृत्तान्तं वक्तुमर्हसि राघवे॥
uttaraṃ punarevedaṃ niścitya manasā tayā |hanuman mama vṛttāntaṃ vaktumarhasi rāghave ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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