वाल्मीकि रामायण 5.58.106
यद्यन्यथा भवेदेतद्द्वौ मासौ जीवितं मम ।न मां द्रक्ष्यति काकुत्स्थो म्रिये सा ऽहमनाथवत्॥
yadyanyathā bhavedetaddvau māsau jīvitaṃ mama |na māṃ drakṣyati kākutstho mriye sā 'hamanāthavat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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