वाल्मीकि रामायण 5.58.111
राजन् वनमिदं दुर्गं तव भग्नं दुरात्मना ।वानरेण ह्यविज्ञाय तव वीर्यं महाबल॥
rājan vanamidaṃ durgaṃ tava bhagnaṃ durātmanā |vānareṇa hyavijñāya tava vīryaṃ mahābala ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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