वाल्मीकि रामायण 5.58.118
तमहं बलसम्पन्नं राक्षसं रणकोविदम् ।परिघेणातिघोरेण सूदयामि सहानुगम् ॥ ५.५८.११८॥
tamahaṃ balasampannaṃ rākṣasaṃ raṇakovidam |parigheṇātighoreṇa sūdayāmi sahānugam || 5.58.118 ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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