वाल्मीकि रामायण 5.58.119
तच्छ्रुत्वा राक्षसेन्द्रस्तु मन्त्रिपुत्रान् महाबलान् ॥ ५.५८.११९ ॥म् ॥ ५.५८.११८॥
tacchrutvā rākṣasendrastu mantriputrān mahābalān || 5.58.119 ||m || 5.58.118 ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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