वाल्मीकि रामायण 5.58.11
प्रहतं च मया तस्य लांगूलेन महागिरेः ।शिखरं सूर्यसङ्काशं व्यशीर्यत सहस्रधा ॥ ५.५८.११॥
prahataṃ ca mayā tasya lāṃgūlena mahāgireḥ |śikharaṃ sūryasaṅkāśaṃ vyaśīryata sahasradhā || 5.58.11 ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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