वाल्मीकि रामायण 5.58.120
पदातिबलसम्पन्नान् प्रेषयामास रावणः ।परिघेणैव तान् सर्वान्नयामि यमसादनम् ॥ ५.५८.१२०॥
padātibalasampannān preṣayāmāsa rāvaṇaḥ |parigheṇaiva tān sarvānnayāmi yamasādanam || 5.58.120 ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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