वाल्मीकि रामायण 5.58.122
तानहं सहसैन्यान् वै सर्वानेवाभ्यसूदयम् ।ततः पुनर्दशग्रीवः पुत्रमक्षं महाबलम्॥
tānahaṃ sahasainyān vai sarvānevābhyasūdayam |tataḥ punardaśagrīvaḥ putramakṣaṃ mahābalam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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