वाल्मीकि रामायण 5.58.125
तत इन्द्रजितं नाम द्वितीयं रावणः सुतम् ।व्यादिदेश सुसंक्रुद्धो बलिनं युद्धदुर्मदम्॥
tata indrajitaṃ nāma dvitīyaṃ rāvaṇaḥ sutam |vyādideśa susaṃkruddho balinaṃ yuddhadurmadam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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