वाल्मीकि रामायण 5.58.127
महतापि महाबाहुः प्रत्ययेन महाबलः ।प्रेषितो रावणेनैव सह वीरैर्मदोत्कटैः॥
mahatāpi mahābāhuḥ pratyayena mahābalaḥ |preṣito rāvaṇenaiva saha vīrairmadotkaṭaiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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