वाल्मीकि रामायण 5.58.128
सो ऽविषह्यं हि मां बुद्ध्वा स्वबलं चावमर्दितम् ।ब्राह्मेणास्त्रेण स तु मां प्राबध्नाच्चातिवेगितः॥
so 'viṣahyaṃ hi māṃ buddhvā svabalaṃ cāvamarditam |brāhmeṇāstreṇa sa tu māṃ prābadhnāccātivegitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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