वाल्मीकि रामायण 5.58.133
रामदूतं च मां विद्धि सुग्रीवसचिवं कपिम् ।सो ऽहं दूत्येन रामस्य त्वत्सकाशमिहागतः॥
rāmadūtaṃ ca māṃ viddhi sugrīvasacivaṃ kapim |so 'haṃ dūtyena rāmasya tvatsakāśamihāgataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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