वाल्मीकि रामायण 5.58.138
वालिना हृतराज्येन सुग्रीवेण महाप्रभुः ।चक्रे ऽग्निसाक्षिकं सख्यं राघवः सहलक्ष्मणः॥
vālinā hṛtarājyena sugrīveṇa mahāprabhuḥ |cakre 'gnisākṣikaṃ sakhyaṃ rāghavaḥ sahalakṣmaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें