वाल्मीकि रामायण 5.58.143
इति वानरराजस्त्वामाहेत्यभिहितो मया ।मामैक्षत ततः क्रुद्धश्चक्षुषा प्रदहन्निव॥
iti vānararājastvāmāhetyabhihito mayā |māmaikṣata tataḥ kruddhaścakṣuṣā pradahanniva ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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