वाल्मीकि रामायण 5.58.146
नैवं राक्षसशार्दूल त्यज्यतामेष निश्चयः ।राजशास्त्रव्यपेतो हि मार्गः संसेव्यते त्वया॥
naivaṃ rākṣasaśārdūla tyajyatāmeṣa niścayaḥ |rājaśāstravyapeto hi mārgaḥ saṃsevyate tvayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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