वाल्मीकि रामायण 5.58.148
सुमहत्यपराधे ऽपि दूतस्यातुलविक्रम ।विरूपकरणं दृष्टं न वधो ऽस्तीति शास्त्रतः॥
sumahatyaparādhe 'pi dūtasyātulavikrama |virūpakaraṇaṃ dṛṣṭaṃ na vadho 'stīti śāstrataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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