वाल्मीकि रामायण 5.58.15
श्रुत्वा नगानां चरितं महेन्द्रः पाकशासनः ।चिच्छेद भगवान् पक्षान् वज्रेणैषां सहस्रशः॥
śrutvā nagānāṃ caritaṃ mahendraḥ pākaśāsanaḥ |ciccheda bhagavān pakṣān vajreṇaiṣāṃ sahasraśaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें