वाल्मीकि रामायण 5.58.160
ततो मे बुद्धिरुत्पन्ना श्रुत्वा तामद्भुतां गिरम् ।अदग्द्धा जानकीत्येवं निमित्तैश्चोपलक्षिता॥
tato me buddhirutpannā śrutvā tāmadbhutāṃ giram |adagddhā jānakītyevaṃ nimittaiścopalakṣitā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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