वाल्मीकि रामायण 5.58.167
एतत्सर्वं मया तत्र यथावदुपपादितम् ।अत्र यन्न कृतं शेषं तत्सर्वं क्रियतामिति॥
etatsarvaṃ mayā tatra yathāvadupapāditam |atra yanna kṛtaṃ śeṣaṃ tatsarvaṃ kriyatāmiti ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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