वाल्मीकि रामायण 5.58.18
एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्य मैनाकस्य महात्मनः ।कार्यमावेद्य तु गिरेरुद्यतं च मनो मम॥
etacchrutvā vacastasya mainākasya mahātmanaḥ |kāryamāvedya tu girerudyataṃ ca mano mama ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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