वाल्मीकि रामायण 5.58.25
तस्य सीता हृता भार्या रावणेन दुरात्मना ।तस्याः सकाशं दूतो ऽहं गमिष्ये रामशासनात्॥
tasya sītā hṛtā bhāryā rāvaṇena durātmanā |tasyāḥ sakāśaṃ dūto 'haṃ gamiṣye rāmaśāsanāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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