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वाल्मीकि रामायण 5.58.27
आगमिष्यामि ते वक्त्रं सत्यं प्रतिश्रृणोमि ते॥
āgamiṣyāmi te vaktraṃ satyaṃ pratiśrṛṇomi te ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंआगमिष्यामि ते वक्त्रं सत्यं प्रतिश्रृणोमि ते॥
āgamiṣyāmi te vaktraṃ satyaṃ pratiśrṛṇomi te ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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