वाल्मीकि रामायण 5.58.28
एवमुक्ता मया सा तु सुरसा कामरूपिणी ।अब्रवीन्नातिवर्तेत कश्चिदेष वरो मम॥
evamuktā mayā sā tu surasā kāmarūpiṇī |abravīnnātivarteta kaścideṣa varo mama ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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