वाल्मीकि रामायण 5.58.35
सो ऽहं विगतवेगस्तु दिशो दश विलोकयन् ।न किंचित्तत्र पश्यामि येन मे ऽपहृता गतिः॥
so 'haṃ vigatavegastu diśo daśa vilokayan |na kiṃcittatra paśyāmi yena me 'pahṛtā gatiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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