वाल्मीकि रामायण 5.58.36
ततो मे बुद्धिरुत्पन्ना किं नाम गगने मम ।ईदृशो विघ्न उत्पन्नो रूपं यत्र न दृश्यते॥
tato me buddhirutpannā kiṃ nāma gagane mama |īdṛśo vighna utpanno rūpaṃ yatra na dṛśyate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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