वाल्मीकि रामायण 5.58.48
जिघांसन्तीं ततस्तां तु ज्वलदग्निशिरोरुहाम् ।सव्यमुष्टिप्रहारेण पराजित्य सुभैरवाम्॥
jighāṃsantīṃ tatastāṃ tu jvaladagniśiroruhām |savyamuṣṭiprahāreṇa parājitya subhairavām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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