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वाल्मीकि रामायण 5.58.50
यस्मात्तस्माद्विजेतासि सर्व रक्षांस्यशेषतः॥
yasmāttasmādvijetāsi sarva rakṣāṃsyaśeṣataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंयस्मात्तस्माद्विजेतासि सर्व रक्षांस्यशेषतः॥
yasmāttasmādvijetāsi sarva rakṣāṃsyaśeṣataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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